गोवर्धन पूजा के फायदे

 गोवर्धन पूजा के फायदे  तथा यह शास्त्रों के अनुसार है या विरुद्ध!

श्री कृष्ण जी की लीला में यह भी एक लीला है गोवर्धन पर्वत को उठाना।जब इंद्र को घमंड आ गया था तो उस घमंड को तोड़ने के लिए श्री कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को उठाया। बृजवासी सभी इंद्र की कढ़ाई किया करते थे इस इंद्र की कढ़ाई को श्री कृष्ण जीने बंद करवा दिया। तब इंद्र ने अपने घमंड में आकर ब्रज वासियों को डुबोने के लिए मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। इस मूसलाधार वर्षा को देख कर सारे बृजवासी दुखी होने लगे तब श्री कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लिया जि।सारे ब्रिज वासियों को कोई नुकसान नहीं हुआ ।जब इंद्र ने पूरी वर्षा करके सोचा कि अब तो सारे बृजवासी डूब गए होगे तब जोर से गरजा गरजने की आवाज को सुनकर मोर बोलने लगे । इंद्र ने सोचा कि यह क्या हुआ यह देख कर इंद्र श्री कृष्ण जी के पास आकर के और उसके पैरों में गिर गए तथा बोला कि हे भगवान माफ करना मेरे से गलती हो गई तब कृष्ण जी ने कहा कि आगे से यह गलती मत करना।
 इसके बाद इन हमारे नकली गुरुओं ने गोवर्धन पूजा प्रारंभ कर दी कि कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत उठाया था वहां जाकर उसके परिक्रमा लगाओ।जिससे कल्याण होगा जबकि श्री कृष्ण जी ने तो देवी देवताओं और मूर्ति पूजा का विरोध किया था। इससेसिद्ध है कि यह गोवर्धन पूजा शास्त्रों के विरुद्ध है कबीर साहिब जी की वाणी है गोवर्धन श्री कृष्ण जी उठायो, द्रोणगिरी हनुमंत ।
शेषनाग ने सारी सृष्टि उठाई, इनमें कौन भगवंत।।
 इस बाणी ने सिद्ध कर दिया है कि श्री कृष्ण जी भगवान नहीं है वह पूर्ण परमात्मा कौन है जिसने सारी सृष्टि की रचना की है वह पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी है यह हमारे वेद, गीता, बाईबल, कुरान  गुरु ग्रंथ साहिब इस सभी शास्त्रों में प्रमाण है कि कबीर देव पूजा के योग्य हैं वह अजर अमर परमात्मा है ।और यह गोवर्धन पूजा भी शास्त्रों के विरुद्ध है जिन से कोई लाभ नहीं इस समय शास्त्रों के अनुसार भक्ति संत रामपाल जी महाराज बताते हैं जिन से नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करने से भगत को पूर्ण सुख व पूर्ण लाभ तथा पूर्ण मोक्ष मिलता है विस्तार से जानने के लिए देखे satlok ashram YouTube चैनल पर visit करे।

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